कुछ बाते ऐसे होते जो शब्दों से इतनी आसानी से बयां नहीं होते। दिल के अंदर के कुछ ख़यालात जो हमेशा बहार आनेकी कोशिश करती रेहती है। पर आ नही पाती। आज कल जिसे देखो ज़िन्दगी के फ़लसफ़े का ज्ञान देते रहते है। पर अंदर से वह खुद उसीका शिकार होते है। जैसे की सब जान्ते है एक जोकर अपना ग़म चुपके दूसरों को हँसता है। ठीक ऐसे ही हमारे साथ होता है। हम दुसरो को जीने का सलिखा बताते है पर खुद ज़िन्दगी में हारे हुए होते है। 

हर साल लाखों लोग पढ़ाई खत्म करते है एक उम्मीद लेकर के एक अच्छिसि नौकरी मिलेंगी ताकि बाकी ज़िन्दगी खुशी से गुज़रे। पर ऐसा कुछ होता नहीं है। हिंदुस्तान में आजकल नौकरी ढूँढना भी एक नौकरी है। हर कंपनी आपमे इश्तेहार में तजुर्बा चाहती है। वह भी 4 से 5 साल तक की। आदमी काम करेगा तब ना उसको तजुर्बा मिलेगा। इतने साल की पढ़ाई कुछ नहीं है उनके लिए। पहले पता होता तो पढ़ाई के बदले काम करता ताकि बढ़िया सा तजुर्बा हँसील हो। आदमी क्या माँ की पेट से तजुर्बा लेके आता।

मैं अपनी बात करता हु, मुझे बचपन से उच्च शिक्शा लेने का मन था इसीलिए मैंने पढ़ाई के बीचमे कभी नौकरी के बारेमें सोचा बी नहीं। मेरा तो एक ही लक्ष् था की पहले अछि शिक्षा प्राप्त करलु बादमे नौकरी के बारेमे देखा जायेगा। पर आजकल तो जैसे नौकरी का अकाल पढ़ गया है देश में। लोग डाक्टरी और इन्जिनीरिंग पढ़ने के बावजूद भी बेकार घूम रहे है। यहाँ तक की म्युनिसिपालिटी के चपरासी के पद में उच्च डिग्री वाले की आबेदन पत्र मिलता है। इस्से ये ज़ाहिर होता है के देश की स्तिति क्या हैं।

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